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लौकी दाल चीला

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लौकी दाल चीला बहुत ही स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है। इससे हमें भरपूर मात्रा में प्रोटींस और विटामिंस मिलते हैं जो हमे स्वस्थ रखते हैं। आप इसे किसी छुट्टी वाले दिन या जब भी आपका मन हो नाश्ते में बनाकर खा सकते हैं। तो आइये आज लौकी और दाल के चीले बनाएं। आवश्यक सामग्री: मूंग दाल - 100 ग्राम चना दाल - 100 ग्राम उरद दाल - 50 ग्राम हींग - 1-2 चुटकी लौकी - 300 ग्राम हरी मिर्च - 3-4 (बारीक काट लें) अदरक - 2 इंच लंबा टुकड़ा (कद्दूकस कर लें) लाल मिर्च - 1/4 (यदि आप चाहें) नमक - 3/4 छोटी चम्मच (स्वादानुसार) बेकिंग पाउडर - 3/4 छोटी चम्मच जीरा - 2 छोटी चम्मच तेल - चीले सेकने के लिये विधि: लौकी दाल चीला बनाने के लिये सबसे पहले सभी दालों को साफ करके अच्छी तरह से धो लीजिये और फिर इन्हें 5-6 घंटे के लिये पानी में भिगो कर रख दीजिये। उसके बाद इन दालों को पानी से निकाल कर मिक्सर में बारीक पीस लीजिये और लौकी को छील कर धोकर कद्दूकस कर लीजिये। दाल के पेस्ट को किसी बर्तन में निकाल कर उसमें कद्दूकस की हुई लौकी, हरी मिर्च, अदरक, नमक व लाल मिर्च (यदि आप चाहें तो) मिलाकर अच्छे से फेंटिये और...

पिज़्ज़ा को तवे पर

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पिज़्ज़ा तो सबको पसंद आता है, खासकर बच्चे तो पिज़्ज़ा को बहुत मज़े से खाते हैं. पिज़्ज़ा को घर पर आसानी से बनाया जा सकता है. अगर ओवन ना भी हो तो भी आप पिज़्ज़ा को तवे पर बना सकते हैं. तवे पर बना पिज़्ज़ा भी उतना ही टेस्टी और यम्मी बनता है. ज़रूरी सामग्री: पिज़्ज़ा के आटे के लिए: मैदा - 2 कप ओलिव ओइल - 2 टेबल स्पून नमक - आधा छोटी चम्मच (स्वादानुसार) चीनी - 1 छोटी चम्मच इन्स्टैंट  यीस्ट (Instant Yeast) - 1 छोटी चम्मच, लेवल करके पिज़्ज़ा की टापिंग के लिए: शिमला मिर्च - 1 बेबी कार्न -  3 पिज्जा सास - आधा कप मोजेरीला चीज़ - आधा कप इटेलियन मिक्स हर्ब्स -आधा छोटी चम्मच बनाने की विधि: मैदे को किसी बर्तन में छान कर उसमें ड्राई इन्सटेन्ट यीस्ट, नमक, चीनी और साथ में आलिव आयल डाल के मिला लें. फिर गुनगुना पानी डालते हुए इसे चपाती के आटे जैसा गूंथ लें. आटे को 5-7 मिनट तक मसलते हुए चिकना कर लें. एक प्याले में तेल लगा कर उसे चिकना कर लें. आटे को उसमें डाल दें और फिर उसे ढक कर किसी गरम जगह पर 2 घंटे के लिए रख दें. इतने समय में आटा फूल कर दोगुना हो जएगा. जब आटा फूल...

ऊर्जा का स्तर बढ़ा सकती हैं जड़ी-बूटियां

रोजमर्रा की आपाधापी और बदलती जीवनशैली के बीच हम कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अगर हम जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल के बारे में अपनी जागरूकता बढ़ाएं तो सेहतमंद जीवन बिता सकते हैं, बता रही हैं वेलनेस विशेषज्ञ डॉं. शिखा शर्मा प्रकृति से जो अनमोल उपहार हमें मिले हैं, उनमें जड़ी-बूटियां भी शामिल हैं। आयुर्वेद में इन जड़ी-बूटियों का विशेष महत्व बताया गया है। आजकल नेचुरोपैथी यानी प्राकृतिक चिकित्सा के बढ़ते प्रचलन के कारण न सिर्फ जड़ी-बूटियों का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि इनके इस्तेमाल को लेकर लोगों की जागरूकता भी बढ़ रही है। ये जड़ी-बूटियां अनेक बीमारियां दूर करने में तो सहायक हैं हीं, मानसिक शांति के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। फायदेमंद हैं जड़ी-बूटियां ऐसी बहुत सी जड़ी-बूटियां हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इनमें से बहुत-सी तो हमारी रसोई में ही मिल जाती हैं। तुलसी:  सर्दी-जुकाम, बुखार, सूखा रोग, निमोनिया, कब्ज, अतिसार जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी औषधि है। लहसुन:  एंटी बैक्टीरियल तत्वों से युक्त है। इसकी एक कली के सेवन से वि...

REMEDIES: गैस्ट्रिक ट्रबल है तो ये करें

गैस्ट्रिक ट्रबल बहुत ही आम है। यह किसी को हो जाए तो उसका दिन बिगड़ जाता है, जिसे ये समस्या होती है उसे एसिड रिफ्लक्स की समस्या भी होने लगती हैं। इसके लक्षण मरीज की हालत खराब कर देते हैं, उसे नींद नहीं आती है। कई बार जब ये समस्या अपनी मनपसंद चीज खाने पर हो जाए तो उससे भी तौबा करने का मन होने लगता है। दरअसल, इस समस्या का मुख्य कारण कुछ आदतें या अनियमित दिनचर्या है। यदि आपको भी अक्सर गैस की समस्या हो जाया करती है तो हम बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे आसान घरेलू नुस्खे जिनसे इस समस्या से बहुत जल्दी राहत मिल जाती है। 1. नारियल पानी-  नारियल पानी गैस की समस्या में दवा का काम करता है। यह विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। पेट की समस्याओं को दूर करता है, जब भी गैस की समस्या हो दो से तीन बार नारियल पानी पिएं। आराम मिलेगा। 2. पाइन एप्पल -  पाइनएप्पल में पाचक एन्जाइम्स मौजूद होते हैं। गैस की समस्या हो तो एल्कलाइन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। पाइनएप्पल में भी एल्कलाइन पाया जाता है। इसीलिए इसके सेवन से गैस की समस्या दूर हो जाती है, लेकिन ये ध्यान रखें हमेशा पका हुआ पाइनएप्पल ख...

शाकाहारियों को कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम

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शाकाहार के वैसे ही कई लाभ हैं, अब ताजा शोध में शाकाहार का एक और फायदा सामने आया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि  शाकाहारी लोगों को कोलोरेक्टल (बड़ी आंत व मलद्वार) कैंसर का खतरा बहुत कम होता है। अमेरिका में कैंसर की वजह से  होने वाली मौतों में कोलोरेक्टल कैंसर दूसरा प्रमुख कारण है। शोध के दौरान कोलोरेक्टल कैंसर और खाने के बीच संबंध का  अध्ययन किया गया। शोध के अनुसार रेड मीट से कैंसर का खतरा बढ़ता है, जबकि फाइबर वाले खाने से यह खतरा कम होता  है। अध्ययन में शामिल 77,659 लोगों में से 380 में कोलन कैंसर और 110 लोगों में रेक्टल कैंसर पाया गया। कैलिफोर्नियाकी  लिंडा यूनिवर्सिटी के माइकल जे. ओर्लिच ने बताया कि गैर शाकाहारियों से तुलना में पाया गया कि शाकाहारी लोगों को कोलन कैंसर होने का खतरा 19 फीसद और रेक्टल कैंसर होने का खतरा 29 फीसद तक कम होता है। हार सकता है कैंसर

10 चीजें: इन्हें खाने से चमकने लगता है चेहरा

आजकल अधिकतर लोग समय की कमी के कारण त्वचा पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। जिसकी वजह स्किन डल हो जाती है। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो हम आपको बताने जा रहे हैं खाने की कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिनके सेवन से चेहरा चमकने लगता है... 1. गाजर-  गाजर का सेवन बेहद फायदेमंद है। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी, सी, कैल्शियम व पैक्टीन फाइबर होता है। यह त्वचा और बालों के लिए बेस्ट है। सुंदर त्वचा पाने के लिए गाजर का जूस रोज पिएं। 2. पपीता-  पपीता में विटामिन सी के अलावा विटामिन ए, ई, और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो स्किन से एक्ने और दाग-धब्बों को हटाते हैं। इसके अलावा यह कब्ज खत्म कर पेट की बीमारियों को दूर कर देता है। 3. सोयाबीन-  सोयाबीन के हर उत्पाद में विटामिन सी और जिंक पाया जाता है। सोया से बनी चीजों को खाने से एक्ने और त्वचा की अन्य समस्याओं से निजात मिलती है। इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप अपनी डल स्किन को चमकदार बना सकते हैं। 4. ब्रोकली-  ब्रोकली में विटामिन सी और ई अधिक मात्रा में होते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। यह कब्ज को दूर करके स्किन क...

बाल गिर रहें हो तो अपनाएं प्याज के ये रामबाण नुस्खे

कभी-कभी बालों का गिरना तो सामान्य-सी बात है, लेकिन रोजाना बालों का बहुत अधिक गिरना अच्छा नहीं है। सोचिए, अगर आपके बाल इसी तरह गिरते रहें, तो कुछ सालों में उनकी दशा क्या होगी। ये एक ऐसी समस्या है जिस पर यदि समय से ध्यान नहीं दिया जाए तो ये बड़ी समस्या का रूप ले सकती है। यदि आप भी बालों के गिरने से परेशान हैं, तो हम आपको बताने जा रहे हैं प्याज के कुछ खास नुस्खे जो इस समस्या में रामबाण हैं। क्यों करें प्याज का उपयोग प्याज बालों को गिरने से रोकता है, क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में सल्फर मौजूद होता है। यही कारण है कि प्याज का रस बालों में लगाने पर इसमें पाया जाने वाला सल्फर रक्त संचार बढ़ाता है। इसका रस स्कल्प इन्फेक्शन को खत्म करता है। साथ ही, बालों को मजबूत बनाता है। कैसे करें उपयोग प्याज को मिक्सर में थोड़ा पानी डालकर पीस लें। इसके बाद रस को छान लें। इसे अपनी उंगली के पोरों से बालों में लगाएं। तीस मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद बालों को किसी अच्छे शैम्पू से धो लें। ये काम हफ्ते में तीन बार करें। प्याज के रस में शहद मिलाकर लगाएं एक-चौथाई कप प्याज के रस में थोड़ा शहद मिलाएं...

कैसे छुड़ायें होली के रंग

होली के बारे में आप जानते ही हैं रंगो के बिना ये अधूरी है। होली पर कोई सूखे रंगों से होली खेलना पसंद करता है तो कोई पानी वाली या प्राकृतिक रंगों से होली खेलना पसंद करता हैं, मगर एक वर्ग ऐसा भी है जो केमिकल और रासानियक रंगों से होली खेलता है, ऐसे रंग जिनको छुड़ाना भी बहुत मुश्किल होती है। होली के बाद रंगों को छुड़ाना बहुत मुश्किल काम होता है, ऐसे में आपको चाहिए कि आप ऐसे रंगों का इस्तेमाल करें जिससे आपकी स्किन को कोई नुकसान ना हो। लेकिन इसके साथ ही ये सवाल भी उठता है कि आखिर के कौन से उपाय हैं जिनसे आसानी से होली के रंगों से निजात पाई जा सकती है। आइए जानें कैसे छुड़ायें होली के रंग। कुछ लोग होली इस डर से नहीं खेलते कि कहीं उनकी स्किन खराब ना हो जाए या फिर वे रंगों को कैसे छुडा़येंगे। क्या  आप जानते हैं किसी भी गहरे से गहरे रंग को हटाना बहुत आसान होता है बस आपको उनको छुड़ाने का तरीका आना चाहिए। रंगों को छुड़ाने के लिए आपको आमतौर पर घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करना चाहिए। होली में रंग छुड़ाने के उपाय अधिक देर तक रंग ना लगाएं यदि आप चाहते हैं कि आपकी त्व‍चा होली के ...

रोज इलायची खाने से दूर हो जाती हैं ये प्रॉब्लम्स, करती है रामबाण का काम

इलायची एक सुगंधित मसाला है। यह मीठे व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इसकी गंध तीखी होती है। इसीलिए इसका उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है। इसमें आयरन, राइबोफ्लेविन, विटामिन सी और नियासिन पाया जाता है। ये रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलायची खाने के कई फायदे हैं। चलिए, आज हम जानते हैं इलायची खाने के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में। पाचन को ठीक कर देती है-  खाने के बाद कई लोग इलायची का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में करते हैं। जानते हैं क्यों? दरअसल, इलायची प्राकृतिक रूप से गैस को खत्म करने का काम करती है। यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने व दिल की जलन को खत्म करने का काम करती है।  आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, यह खाने के पाचन में मदद करती है। यदि आपको बदहजमी की शिकायत है तो दो से तीन इलायची, अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा, थोड़ी-सी लौंग और सूखा धनिया पीस लें। इस पाउडर को गर्म पानी के साथ खाएं। पेट से जुड़ी प्रॉब्लम्स खत्म हो जाएंगी। सांस की दुर्गंध दूर करती है- इलायची में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। साथ ही, इस...

दालचीनी (Cinnamon bark)-

दालचीनी का प्रयोग सर्वत्र मसालों के रूप में किया जाता है | भारत में मुख्यतः तमिलनाडु,कर्नाटक एवं केरल में इसकी खेती की जाती है | दालचीनी की छाल तेजपात की छाल से अधिक पतली,पीली व अधिक सुगन्धित तथा स्वादयुक्त होती है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से दिसंबर तक होता है | आइये जानते हैं दालचीनी के कुछ औषधीय गुणों के विषय में - १- दालचीनी के तेल को मस्तक पर मलने से सर्दी की वजह से होने वाला सिरदर्द मिट जाता है | २- दालचीनी का तेल आँखों के ऊपर (पलकों पर) लगाने से आँख का फड़कना बंद हो जाता है और नेत्रों की ज्योति बढ़ती है | ३- आधा चम्मच दालचीनी चूर्ण को दो चम्मच मधु के साथ सुबह शाम सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है | ४-दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंतों का खिंचाव दूर हो जाता है | ५- शहद और दालचीनी मिलाकर रोग ग्रसित भाग पर लगाने से थोड़े-ही-दिनों में खाज-खुजली तथा फोड़े-फुंसी जैसे चर्म रोग नष्ट हो जाते हैं | हानि - इसकी अधिक मात्रा उष्ण प्रकृति वालों को सिरदर्द पैदा करती है | दालचीनी गर्भवती स्त्रियों को नहीं देनी चाहिए |

बेल -

बेल का वृक्ष बहुत प्राचीन है |यह लगभग २०-३० फुट ऊंचा होता है | इसके पत्ते जुड़े हुए त्रिफाक और गंधयुक्त होते हैं | इसका फल ३-४ इंच व्यास का गोलाकार और पीले रंग का होता है | बीज कड़े और छोटे होते हैं | बेल के फल का गूदा और बीज एक उत्तम विरेचक (पेट साफ़ करने वाले ) माने जाते हैं | बेल शर्करा को कम करने वाला,कफ व वात को शांत करने वाला,अतिसार, मधुमेह,रक्तार्श,श्वेत प्रदर व अति रज : स्राव को नष्ट करने वाला होता है | आइए जानते हैं बेल के औषधीय गुण - १- पके हुए बेल का शर्बत पुरान े आंव की महाऔषधि है | इसके सेवन से संग्रहणी रोग बहुत जल्दी ही दूर हो जाता है | २- बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है | पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाने से लाभ मिलता है | ३- दस ग्राम बेल के पत्तों को ४-५ कालीमिर्च के साथ पीसकर उसमे १० ग्राम मिश्री मिलकर शरबत बना लें | इसका दिन में तीन बार सेवन करने से पेट दर्द ठीक हो जाता है | ४- बेल के गूदे को गुड़ मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार (खूनी दस्त ) के रोगी का रोग दूर हो जाता है | ५- मिश्री मिले हुए दूध के साथ बेल की गिरी के चूर्ण का सेवन ...

थकावट ********

थकान शब्द से सभी परिचित हैं प्रायः थकावट से सभी का आमना - सामना होता है | सभी सोचते हैं थकावट कैसे दूर की जाए , आइये आज इस पर थोड़ा विचार किया जाए | १- अधिक थकान होने पर, सोते समय गर्म दूध का सेवन करें , दूध हमेशा घूँट -घूँट करके पियें , चाहें तो दूध में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी मिला सकते हैं | दूध को भली - भांति फेंट कर [ झाग बनाकर ] ही पियें यह अधिक लाभप्रद होता है |  २- अधिक दौड़ने - भागने , चढ़ाई चढ़ने - उतरने या अधिक पैदल चलने के कारण हुई थकान दूर करने के लि ए आधा बाल्टी गर्म - पानी लें , उसमें दो चम्मच नमक डालें और बाल्टी में पैर डालकर बैठ जाएँ | थोड़ी देर में जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो और गर्म पानी डाल लें | आधे घंटे में फर्क महसूस करें | ३- थकावट दूर करने के लिए घर में किसी शांत स्थान पर , ढीले वस्त्र पहन कर शवासन में विश्राम करें , अर्थात कसे हुए वस्त्र बदलकर आरामदायक वस्त्र पहने और लेटकर शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें और विश्राम करें |

कटहल (Jackfruit )-

कटहल का प्रयोग बहुत से कामों में किया जाता है | कच्चे कटहल की सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनती है तथा पक जाने पर अंदर का गूदा खाया जाता है | कटहल के बीजों की सब्जी भी बनाई जाती है | आमतौर पर यह सब्जी की तरह ही प्रयोग में आता है परन्तु कटहल में कई औषधीय गुण भी पाये जाते हैं| कटहल में कई महत्वपूर्ण प्रोटीन्स,कार्बोहाइड्रेट्स के अलावा विटामिन्स भी पाये जाते हैं | कटहल के औषधीय गुण - १- पके हुए कटहल के सेवन से गैस और बदहज़मी में लाभ होता है | २- कटहल की पत्तियों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण एक छोटी चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से पेट के अलसर में आराम मिलता है | ३- कटहल की छाल घिसकर लेप बना लें | यह लेप मुहँ के छालों पर लगाने से छाले दूर होते हैं | ४- कटहल के पत्तों को गर्म करके पीस लें और इसे दाद पर लेप करें | इससे दाद ठीक होता है | ५- कटहल के पत्तों पर घी लगाकर एक्ज़िमा पर बाँधने से आराम मिलता है ६- कटहल के ८-१० बीजों के चूर्ण का क्वाथ बनाकर पीने से नकसीर में लाभ होता है |

मौसमी -

मौसमी अधिकतर दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला फल है | भारत में यह फल जुलाई, अगस्त तथा नवम्बर- मार्च तक उपलब्ध रहता है | यह देखने में कुछ -कुछ नींबू की तरह होती है परन्तु स्वाद में यह मीठी होती है | मौसमी का फल नारंगी के बराबर आकार का होता है| मौसमी खाने में शीतल होती है तथा इसका सेवन सभी प्रकृति वालों के लिए तथा सभी अवस्थाओं में लाभदायक है | मौसमी रुचिकारक, धातुवर्धक और खून को साफ़ करने वाली है | इसके सेवन से पाचन में लाभ मिलता है | आइये जानते हैं मौसमी के कुछ ला भ - १- मौसमी का रस पीने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा जीवनी शक्ति की वृद्धि होती है | २- मौसमी खाने से दांत मज़बूत होते हैं और इसका रेशा कब्ज़ दूर करने में मदद करता है | ३-मौसमी के रस में क्षार तत्व अधिक होता है अत: यह खून की अम्लता (एसिडिटी) को दूर करता है| ४- मौसमी के रस को हल्का सा गर्म करके इसमें ५ - ६ बूँद अदरक का रस डालकर पीने से जुकाम में आराम मिलता है | ५- मौसमी या इसके रस के सेवन से रक्तवाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा नहीं हो पाता और ह्रदय रोग होने की संभावना नहीं रहती | अतः इसका सेवन ह्रदय को स्वस्थ...

गाजर, पुदीना और सौंफ के घरेलू उपाय, इनसे बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाएगा

यदि आपका लगातार वजन बढ़ रहा है तो सावधान हो जाइए। कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे छोटे-छोटे नुस्खे, जिन्हें अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत किए वजन को नियंत्रित कर सकते हैं। - पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर चपाती के साथ खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है। - रोज खाने से पहले गाजर खाएं। खाने से पहले गाजर खाने से भूख कम हो जाएगी। आधुनिक विज्ञान भी गाजर को मोटापा कम करने में कारगर मानता है। - आधा चम्मच सौंफ को एक कप खौलते पानी में डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा तीन माह तक लगातार करने से वजन कम होने लगता है। - पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।  - दही का खाने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें। - छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सु...

ईसबगोल (Spogel seeds) -

ईसबगोल का मूल उत्त्पत्ति स्थान ईरान है और यहीं से इसका भारत में आयात किया जाता है | इसका उल्लेख प्राचीन वैद्यक शास्त्रों व निघण्टुओं में अल्प मात्रा में पाया जाता है| 10वीं शताब्दी पूर्व के अरबी और ईरान के अलहवीं और इब्नसीना नामक हकीमों ने अपने ग्रंथों में औषधि द्रव्य के रूप में ईसबगोल का निर्देश किया था | तत्पश्चात कई यूनानी निघण्टुकारों ने इसका खूब विस्तृत विवेचन किया | फारस में मुगलों के शासनकाल में इसका प्रारम्भिक प्रचार यूनानी ह कीमों ने इसे ईरान से यहां मंगाकर किया | तब से जीर्ण प्रवाहिका और आंत के मरोड़ों पर सुविख्यात औषधोपचार रूप में इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाने लगा और आज भी यह आंत्र विकारों की कई उत्तमोत्तम औषधियों में अपना खास दर्जा रखती है |इनके बीजों का कुछ आकार प्रकार घोड़े के कान जैसा होने से इसे इस्पगोल या इसबगोल कहा जाने लगा | आजकल भारत में भी इसकी खेती गुजरात,उत्तर प्रदेश,पंजाब और हरियाणा में की जाती है| औषधि रूप में इसके बीज और बीजों की भूसी प्रयुक्त की जाती है | बीजों के ऊपर सफ़ेद भूसी होती है | भूसी पानी के संपर्क में आते ही चिकना लुआव बना लेती है जो गंधरहित और स्वा...

कढ़ी पत्ता (मीठा नीम,कैडर्य) -

अत्यन्त प्राचीन काल से भारत में मीठे नीम का उपयोग किया जा रहा है | कई टीकाकारों ने इसे पर्वत निम्ब तथा गिरिनिम्ब आदि नाम दिए हैं | इसके गीले और सूखे पत्तों को घी या तेल में तल कर कढ़ी या साग आदि में छौंक लगाने से ये अति स्वादिष्ट,सुगन्धित हो जाते हैं | दाल में इसके पत्तों का छौंक देने से दाल स्वादिष्ट बन जाती है,चने के बेसन में मिलाकर इसकी उत्तम रुचिकर पकौड़ी बनाई जाती है| आम,इमली आदि के साथ इसके पत्तों को पीसकर बनाई गई चटनी अत्यंत स्वादिष ्ट व सुगन्धित होती है | इसके बीजों तथा पत्तों में से एक सुगन्धित तेल निकला जाता ही जो अन्य सुगन्धित तेलों के निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होता है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल क्रमशः फ़रवरी से अप्रैल तक तथा अप्रैल से अगस्त तक होता है | इसकी पत्तियों में ओक्सालिक अम्ल,कार्बोहाइड्रेट,कैल्शियम,फॉस्फोरस,अवाष्पशील तेल,लौह,थाइमिन,राइबोफ्लेविन,तथा निकोटिनिक अम्ल पाया जाता है | कढ़ी पत्ते के औषधीय प्रयोग- १- मीठे नीम के पत्तों को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिर दर्द ठीक होता है | २- मीठे नीम के पत्तों को पानी में उबालकर गरारे करने से छाले ठीक होते हैं तथा २-४ पत्...

अनानास (Pineapple) -

अनानास ब्राज़ील का आदिवासी पौधा है | क्रिस्टोफर कोलंबस ने 1493 AD में कैरेबियन द्वीप समूह के ग्वाडेलोप नाम के द्वीप में इसे खोजा था और इसे 'पाइना दी इंडीज' नाम दिया | कोलंबस ने यूरोप में अनानास की खेती की शुरुआत की थी | भारत में अनानास की खेती की शुरुआत पुर्तगालियों ने 1548 AD में गोवा से की थी | अनानास की डालियाँ काटकर बोने से उग आती हैं | अनानास का फल बहुत स्वादिष्ट होता है | इसके कच्चे फल का स्वाद खट् टा तथा पके फल का स्वाद मीठा होता है । इसके फल में थाइमिन,राइबोफ्लेविन,सुक्रोस,ग्लूकोस,कैफीक अम्ल,सिट्रिक अम्ल,कार्बोहाईड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है | आज हम आपको अनानास के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे - १- अनानास फल के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से दमे और खाँसी में लाभ होता है| २- यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है | इसके सेवन से रक्तवृद्धि होती है और पाचनक्रिया तेज़ होती है | ३- अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधानमक और कालीमिर्च मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है | ४- अनानास के पत्तों का काढ़ा बनाकर उ...

आलू -

आलू को अनाज के पूरक आहार का स्थान प्राप्त है | यह सब्जियों का राजा माना जाता है क्योंकि दुनिया भर में सब्जियों के रूप में आलू का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है | आलू में कैल्शियम,लोहा,विटामिन -बी तथा फॉस्फोरस बहुत अधिक मात्रा में होता है | आलू के छिलके निकाल देने पर उसके साथ कुछ पोषक तत्व भी चले जाते हैं अतः आलू का छिलके सहित सेवन अधिक लाभप्रद है | आइए जानते हैं आलू के कुछ औषधीय गुण - १- आलू मोटापा नहीं बढ़ाता है | आलू को तलकर,तीखे मसाले,घी आदि लगा कर खाने से मोटापा बढ़ता है | आलू को उबालकर या गर्म रेत अथवा गर्म राख पर भूनकर खाना लाभकारी है | २- चोट लगने पर यदि शरीर में नील पड़ जाए तो उसपर कच्चा आलू पीसकर लगाने से लाभ होता है | ३- कच्चे आलू का आधा-आधा कप रस दिन में दो बार पीने से पेट की गैस में आराम मिलता है | ४- शरीर के जले हुए भाग पर आलो पीस कर लगाएं | ऐसा करने से जलन ख़त्म होकर आराम आ जाता है | ५- चेहरे पर कच्चा आलू रगड़ने से झाँइयों व मुहाँसों आदि के दाग मिटकर चेहरा कान्तियुक्त बनता है |